श्री गणेश चालीसा
चालीसागणेश जी

श्री गणेश चालीसा

✍️ Akhand Bhakti Sagar
श्री गणेश चालीसा - विघ्नहर्ता गणपति की महिमा का गुणगान करने वाली यह चालीसा किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में पढ़ी जाती है।
📿 गीत / बोल
दोहा:
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई:
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्वविख्याता॥
ऋद्धि सिद्धि तव चँवर सुधारे।
मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगलकारी॥
दोहा:
जो यह चालीसा पढ़े, ध्यान लगाय नित्य।
गणपति मिलें कृपा करें, सो भव उतरें नित्य॥

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