
आरतीश्री कृष्ण
ॐ जय जगदीश हरे
✍️ Akhand Bhakti Sagar
ॐ जय जगदीश हरे - यह भारत की सबसे प्रसिद्ध और सार्वभौमिक आरती है जो प्रतिदिन लाखों घरों में गाई जाती है।
📿 गीत / बोल
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनशे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूर्ख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राण पति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा मैं तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
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